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ज्ञानवापी मामला: वाराणसी की अदालत ने मुस्लिम पक्ष की याचिका खारिज की

पांच महिलाओं ने याचिका दायर कर हिंदू देवी-देवताओं की दैनिक पूजा की अनुमति मांगी थी, वें मूर्तियों के ज्ञानवापी मस्जिद की बाहरी दीवार पर स्थित होने का दावा करती हैं।

नई दिल्ली: वाराणसी जिला अदालत ने सोमवार को उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें ज्ञानवापी मस्जिद की बाहरी दीवार पर स्थित हिंदू देवी-देवताओं की दैनिक पूजा की अनुमति मांगने वाली याचिका की सुनवाई पर सवाल उठाया गया था। जिला न्यायाधीश एके विश्वेश ने आदेश दिया कि अदालत द्वारा मंदिर में पूजा के अधिकार की मांग वाली याचिका पर सुनवाई जारी राखी जाएगी।


अदालत ने मस्जिद परिसर में हिंदू देवताओं की दैनिक पूजा की अनुमति मांगने वाली याचिका को बनाए रखने के लिए सहमति व्यक्त की है।


क्या है आदेश?

  • सबसे पहले, अदालत द्वारा याचिका को 'धारणीय' रखने के बाद, परिसर में श्रृंगार गौरी और अन्य देवताओं की पूजा करने की अनुमति मांगने वाले हिंदू पक्षों की याचिका पर सुनवाई जारी रहेगी।

  • जिला अदालत के आदेश के खिलाफ मुस्लिम पक्ष इलाहाबाद उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाएगा।

  • दैनिक पूजा की याचिका पर 22 सितंबर को सुनवाई होने की संभावना है।

  • हिंदू पक्ष आगे भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) सर्वेक्षण और 'शिवलिंग' की कार्बन डेटिंग की मांग करेगा।

पांच महिलाओं ने याचिका दायर कर हिंदू देवी-देवताओं की दैनिक पूजा की अनुमति मांगी थी, जिनकी मूर्तियों को ज्ञानवापी मस्जिद की बाहरी दीवार पर स्थित होने का दावा किया जाता है। अंजुमन इंतेजामिया मस्जिद समिति ने कहा है कि ज्ञानवापी मस्जिद एक वक्फ संपत्ति है और उसने याचिका की सुनवाई पर सवाल उठाया है। जिला जज ने पिछले महीने सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील मामले में फैसला 12 सितंबर तक के लिए सुरक्षित रख लिया था। कोर्ट ने मामले में सुनवाई की अगली तारीख 22 सितंबर तय की है।


हिंदू पक्ष के वकील मदन मोहन यादव ने दावा किया था कि मंदिर को तोड़कर मस्जिद का निर्माण किया गया था। इससे पहले, एक निचली अदालत ने परिसर के वीडियोग्राफिक सर्वेक्षण का आदेश दिया था। 16 मई को सर्वे का काम पूरा हुआ और 19 मई को कोर्ट में रिपोर्ट पेश की गई। हिंदू पक्ष ने निचली अदालत में दावा किया था कि ज्ञानवापी मस्जिद-श्रृंगार गौरी परिसर के वीडियो ग्राफिक सर्वे के दौरान शिवलिंग मिला था, जिसका मुस्लिम पक्ष ने विरोध किया था।


सुप्रीम कोर्ट ने 20 मई को मामले को एक सिविल जज (सीनियर डिवीजन) से जिला जज को ट्रांसफर करते हुए कहा था कि इस मुद्दे की "जटिलताओं और संवेदनशीलता" को देखते हुए, यह बेहतर है कि एक वरिष्ठ न्यायिक अधिकारी जिसे 25-30 साल से अधिक का अनुभव हो, इस मामले को संभाले।


पीठ ने यह भी कहा कि मुसलमानों के मस्जिद में नमाज या धार्मिक अनुष्ठान करने के लिए प्रवेश करने पर किसी भी तरह का प्रतिबंध नहीं लगाया जाना चाहिए।


यह मामला मस्जिद प्रबंधन समिति की ओर से दायर एक याचिका पर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था, जिसमें दीवानी जज के आदेश को चुनौती दी गई थी। आदेश के अनुसार काशी विश्वनाथ मंदिर से सटे मस्जिद के अंदर हिंदू देवताओं की मूर्तियों के कथित अस्तित्व के बारे में सबूत एकत्र करने के लिए मस्जिद के परिसर के निरीक्षण, सर्वेक्षण और वीडियोग्राफी की अनुमति दी गयी है।

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